kareri lake in himachal pradesh in hindi
हिमाचल प्रदेश में कई पर्यटन स्पॉट हैं। लिहाजा, हिमाचल हर गर्मी के सीजन में देशी व विदेशी पर्यटकों को खुब सुहाता है। हिमाचल में बर्फवारी के साथ ट्रैकिंग का लुत्फ उठाने के लिए भी लोग आते-जाते रहते हैं। ऐसे ही पर्यटन डेस्टीनेशन में करेरी लेक भी आती है। यहां का रोमांच तन और मन को पूरी तरह से रोमांचित कर देता है। kareri lake धर्मशाला में है। यहां बता दें कि धर्मशाला परम पावन दलाई लामा की निवास भूमि भी है, जिसे देवताओं की भूमि भी माना जाता है। इसमें कोई दोराय नहीं कि धर्मशाला एक शानदार जगह है। यहां कलकल-छलछल करती नदियां और बर्फ से ढके पहाड़ आसानी से देखने को मिल जाएंगे। ऐसे में, यहां ट्रैकिंग का मजा भी लोग आसानी से लेते हैं। वहीं, यहां स्थित करेरी लेक धर्मशाला की खुबसूरत वादियों से भी रुबरु कराती हैं।
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| करेरी लेक |
करेरी लेक ट्रैकिंग की शुरूआत धर्मशाला के पास स्थित घोरा गांव के शुरूआती बिंदू से होती है। ट्रैकर्स धर्मशाला से घोरा गांव बस या कार द्बारा आसानी से पहुंच सकते हैं। यह धर्मशाला से करीबन 2० किमी की दूरी पर स्थित है। यहां अन्य जगहों पर भी घूमा जा सकता है। साथ ही, शाम के समय के घेरा यानि ट्रैकिंग के अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान कर सकते हैं।
करेरी गांव कैंप ट्रैकिंग 17 किमी के लिए तीसरे दिन शुरूआत होती है। यहां बता दें कि घोरा से जो कि धर्मशाला से करीब 20 किमी की दूरी पर स्थित है। यह ट्रैकिंग नदी और पहाड़ों व घने जंगलों के बीच से होकर गुजरती है। करेरी गांव से रोओती चौथे दिन की ट्रैकिंग की शुरूआत होती है। यहां सुबह के नाश्ते से उसके बाद ट्रैकर्स अपने-अपने अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान कर सकते हैं। चौथे दिन की ट्रैकिंग की शुरूआत करी गांव से राओती तक होती है। ट्रैकर्स राऔती पहुंचकर कैंप में आराम भी फरमा सकते हैं। वहीं, पांचवे दिन सुबह का नाश्ता करने के बाद ट्रैकर्स राऔती से करेरी झील की ओर ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। करेरी झील के पास ही एक मंदिर स्थित है। साथ ही, पास में नदी भी है, जिसकी कलकल, छलछल की ध्वनि सभी को अपनी तरफ आकर्षित करती है। ट्रैकिंग के आखिरी दिन ट्रैकर्स झील के किनारे एक सूकुन भरी रात बिता सकते हैं। उसके अगले दिन करेरी गांव की ओर वापस जा सकते हैं।
करेरी झील से करेरी गांव की दूरी करीब 15 किमी है, जिसे छह घंटे में पूरी किया जा सकता है। ट्रैकर्स करेरी गांव में रूककर हल्का-सा नाश्ता करने के बाद धर्मशाला रवाना हो सकते हैं। करेरी लेक ट्रैकिंग का सबसे अच्छा समय मई-जून के बीच का होता है। इसके अलावा सितंबर से अक्टूबर तक भी यहां ट्रैकिंग लुत्फ उठाया जा सकता है। ट्रैकिंग से जुड़े लोगों ने बताया कि ट्रैकिंग के दौरान जो जरूरी चीजें होती हैं, उनमें वाल्किंग स्टिक, कॉटन मोजे, ऊनी मोजे, दो जोड़ी जूते बैक पैक,टॉर्च लाइट, जैकेट, सनग्लास, कैप संसक्रीम, ऊनी दस्ताने आदि शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि यह चीजें साथ में रहेंगी तो दिक्कत नहीं होगी।
करेरी झील से करेरी गांव की दूरी करीब 15 किमी है, जिसे छह घंटे में पूरी किया जा सकता है। ट्रैकर्स करेरी गांव में रूककर हल्का-सा नाश्ता करने के बाद धर्मशाला रवाना हो सकते हैं। करेरी लेक ट्रैकिंग का सबसे अच्छा समय मई-जून के बीच का होता है। इसके अलावा सितंबर से अक्टूबर तक भी यहां ट्रैकिंग लुत्फ उठाया जा सकता है। ट्रैकिंग से जुड़े लोगों ने बताया कि ट्रैकिंग के दौरान जो जरूरी चीजें होती हैं, उनमें वाल्किंग स्टिक, कॉटन मोजे, ऊनी मोजे, दो जोड़ी जूते बैक पैक,टॉर्च लाइट, जैकेट, सनग्लास, कैप संसक्रीम, ऊनी दस्ताने आदि शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि यह चीजें साथ में रहेंगी तो दिक्कत नहीं होगी।

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