आध्यात्मिक और ध्यान का केंद्र है उत्तराखंड का डोल आश्रम


डोल आश्रम को माना जाता है देवभूमि उत्तराखंड का पांचवा धाम

देवभूमि उत्‍तराखंड अपने पर्यटनस्‍थलों के लिए मशहूर है। यहां पर्यटक जाना बहुत पंसद करते हैं, क्‍योंकि यह देश की राजधानी दिल्‍ली के काफी नजदीक है। चाहे झीलों का शहर नैनीताल हो, अल्‍मोड़ा हो या फिर ऋषिकेश हो या मसूरी हो। ये शहर पर्यटन के लिहाल से काफी समृद्ध हैं। वैसे तो और भी बहुत सारी जगहें हैं, जो उत्‍तराखंड को पर्यटन के मामले में एक अलग पहचान देते हैं। अगर, आप अल्‍मोड़ा जाते हैं तो यहां वैसे तो बहुत से स्‍थल हैं, लेकिन इनमें अल्‍मोड़ा के लमगड़ा ब्‍लॉक में स्थित डोल आश्रम (Dol Ashram of Uttarakhand) अपने-आप में खास है। खुबसूरत वादियों के बीच घिरा यह आश्रम आध्‍यात्मिक और ध्‍यान का केंद्र है। इसे देवभूमि उत्‍तराखंड का पांचवां धाम भी कहा जाता है।



1991 में हुई डोल आश्रम की स्‍थापना

डोल आश्रम (Dol Ashram)  की स्थापना 1991 में हुई थी। आश्रम की स्थापना तपस्वी बाबा कल्याणदासजी ने की थी। दरअसल, बाबा कल्याणदासजी ने 12 साल की उम्र में गृह त्याग कर भारत के विभिन्न धार्मिक स्थानों का भ्रमण किया था, जब बाबा कल्याणदासजी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए, तो वहां उन्हें मां भगवती के दर्शन हुए। यहीं पर वो हिमालय में एक आश्रम बनाने के लिए प्रेरित हुए थे। उसी प्ररेणा के तहत उन्‍होंने डोल आश्रम की स्‍थापना की। इस आश्रम के मुख्‍य महंत भी बाबा कल्‍याण दास महाराज जी ही हैं। उनका मानना है कि यह सिर्फ साधु संत के रहने और माला जपने वाला मठ नहीं है, बल्कि यह आश्रम आध्यात्मिक व साधना का केंद्र भी है, जहां हजारों श्रद्धालु साधना और ध्यान कर सके। इस आश्रम से न सिर देश बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं।

आश्रम में संस्‍कृत विद्धालय भी किया जाता है संचालित

डोल आश्रम में संस्कृत विद्यालय का संचालन भी किया जाता है, इसकी शुरुआत पांच छात्रों के साथ की गई थी। अब इस विद्यालय में 110 छात्र पढ़ते हैं और छात्रों की पढ़ाई नि:शुल्क होती है। मध्य प्रदेश, गुजरात, पड़ोसी देश नेपाल और पहाड़ी अंचल के बच्चे यहां पढ़ते हैं। डोल आश्रम में प्रवेश मुफ़्त है, यहां कपड़ों को रीसाइकल नहीं किया जाता। व्हीलचेयर लाने-ले जाने की सुविधा वाला दरवाज़ा और पार्किंग की भी सुविधा है। एडवांस में टिकट बुक करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

पांच देवी-देवताओं के हैं मंदिर

यहां पांच देवी-देवताओं भगवान गणेश, विष्‍णु, शिव शंकर, शक्ति सूर्य और मां त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर है। वर्ष 2018 में दुनिया के सबसे भारी श्रीयंत्र को भी यहां स्‍थापित किया जा चुका है, जिसकी लंबाई लगभग साढ़े तीन फुट है। अष्‍ट धातु से निर्मित इस श्रीयंत्र का वजन लगभग डेढ़ टन यानी 150 क्विंटल है।

अत्‍मोड़ा से 40 किमी. की दूरी पर है स्थित

डोल आश्रम उत्‍तराखंड के अत्‍मोड़ा से 40 किमी. दूरी पर स्थित है, जिसे श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम के नाम से भी जाना जाता है। यह आश्रम एक ऊंची पहाड़ी पर हरे भरे घने जंगलों के बीच स्थित है। दरअसल, इस आश्रम का निर्माण योग और ध्यान के लिए किया गया था, इसीलिए यह न केवल एक आश्रम है, बल्कि आध्यात्मिक आस्था का केंद्र भी है, लिहाजा इस आश्रम का उद्देश्य ना सिर्फ योग और ध्यान को सीखना है, बल्कि वैदिक शिक्षा भी देना है। यहां वैदिक शिक्षा का एक केंद्र भी है।

इस तरह पहुंच सकते हैं डोल आश्रम :

डोल आश्रम सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, इसीलिए आप यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। अगर आप ट्रेन या फिर हवाई जहाज के माध्‍यम से यहां जाना चाहते हैं तो ट्रेन काठगोदाम तक जाती है, जबकि यहां का नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर है।

सड़क मार्ग : दिल्‍ली से आने पर आनंद विहार से बस द्वारा हल्द्वानी जा सकते हैं। हल्‍द्वानी से डोल आश्रम की दूरी लगभग 70 किमी. है। यहां से आप यह तो व्‍यक्ति रूप से टैक्‍सी बुक कर डोल आश्रम पहुंच सकते हैं या फिर साझा सवारियों को लेकर जाने वाली टैक्सियों के माध्‍यम से डोल आश्रम पहुंच सकते हैं।

ट्रेन के माध्‍यम से : आप यहां ट्रेन के माध्‍यम से भी पहुंच सकते हैं, लेकिन ट्रेन आपको काठगोदाम तक पहुंचाएगी। यही यहां का निकटतम रेलवे स्‍टेशन है। यहां से डोल आश्रम की दूरी लगभग 65 किमी. है। यहां व्‍यक्ति रूप से टैक्‍सी बुक करके या फिर साझा रूप से सवारियों को ले जाने वाली टैक्सियों के माध्‍यम से यहां पहुंचा जा सकता है।

हवाई मार्ग : अगर आप हवाई मार्ग से जाना चाहते हैं तो आपके पास यह विकल्‍प भी है, हालांकि यहां का निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। यहां से डोल आश्रम की दूरी लगभग 98 किमी. है। यहां से बस से आप हल्‍द्धवानी या अल्‍मोड़ा, लमगड़ा जा सकते हैं या फिर टैक्सियों के माध्‍यम से भी यहां पहुंच सकते हैं।

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