facts about india gate in hindi
यह बात दीगार है कि राजधानी दिल्ली में गर्मी में तपिश
और सर्दी में ठंडक अपने उफान पर होती है। यहां की न तो अधिक गर्मी सहन करने लायक होती
है और न ही सर्दी। ऐसे में, अगर दिल्ली के दूसरे हिस्सों के लोग यहां घूमकर इंडिया
गेट देखने का मन बना रहे हैं तो आप फरवरी से अप्रैल व अगस्त से नवंबर की समयावधि को
चुन सकते हैं, क्योंकि इस दौरान अन्य समयावधि के इतर मौसम सामान्य रहता है। ऐसे में,
इस दौरान इंडिया गेट घूमकर यहां का पूरा लुत्फ उठाया जा सकता है। इस दौरान पूरे दिन
में कभी यहां आया जा सकता है। रात के वक्त भी परफेक्ट लाइटिंग के साथ यहां का नजारा
बेहद लुभावना लगता है। 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस व 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस
के दौरान इंडिया गेट को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इस दौरान भी यहां आकर इस नजारे
का लुत्फ उठाया जा सकता है।
India Gate के बारे में
India Gate भारत का प्रसिद्ध राष्ट्रीय स्मारक
है, जिसे अखिल बुद्ध स्मारक के नाम से भी जाना जाता है। यह देश की राजधानी दिल्ली के
राजपथ पर स्थित है। राजपथ को पहले किंग्सवे के नाम से भी जाना जाता है। यह स्मारक
42 मीटर ऊंचा एक विशाल द्बार है, जिसे प्रसिद्ध वास्तुकार सर एडिवन लैंडसियर लुटियन
ने डिजाइन किया था। इस स्मारक का निर्माण सन् 1931 में अंग्रेज शासकों द्बारा 8० हजार
भारतीय सैनिकों की स्मृति में किया गया था, जो प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में
शहीद हो गए थे। यह स्मारक पेरिस के आर्क डेट्रायम्फ से प्रेरित है। हर साल 26 जानकारी
को इंडिया गेट पर गणतंत्र दिवस की परेड होती है।
कब कराया निर्माण
कब पड़ी नींव
वैसे तो राजधानी
दिल्ली में कई ऐसी जगहें हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र हैं, लेकिन India Gate दिल्ली के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है।
यह खुबसूरती के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक पहचान के माध्यम से लोगों को खूब लुभाता है।
यह राजधानी दिल्ली के बिल्कुल केंद्र में स्थित है। इसीलिए दिल्ली के साथ ही एनसीआर,
देश के दूसरे हिस्सों के लोग व विदेशी पर्यटक भी यहां आते रहते हैं। उनके लिए भी यह
बेहद आकर्षक का केंद्ग बना रहता है, क्योंकि इसका इतिहास अंग्रेजों के जमाने से जुड़ा
हुआ है। इसका ऐतिहासिक स्ट्रचर भी एडविन लुटियन द्बारा डिजाइन किया गया था।
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| इंडिया गेट |
घूमने का सही समय
यह स्मारक लाल
और पीले बलुआ पत्थर से बना हुआ है। इसका निर्माण 1931 में भारतीय सैनिकों की स्मृति
में करवाया गया था। इस स्मारक के ऊपर दोनों तरफ इंडिया लिखा हुआ है। भारत की स्वतंत्रता
के पश्चात् इसकी मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति स्थापित कर दी गई है। सैनिकों की स्मृति
में यहां एक राइफल के ऊपर सैनिक की टोपी सजा दी गई है।
India Gate की नींव 1921 में डयूक ऑफ कनौट ने रखी थी, जिसे कुछ वर्ष पश्चात् तत्कालीन वायसराय
लॉर्ड इरविन ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। अमर ज्योति का निर्माण स्वतंत्रता के
बाद करवाया गया था। यहां हमेशा एक ज्वाला जलती रहती है, जो उन सैनिकों की स्मृति में
है, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। अमर ज्योति की स्थापना
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लेने वाले सैनिकों की स्मृति में की गई थी।
कैसे पहुंचे
हवाई यात्रा
हवाई यात्रा के माध्यम से India Gate तक पहुंचना बेहद आसान है, क्योंकि दुनिया के सभी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस दिल्ली के माध्यम से ही उड़ान भरती हैं। यहां से 23 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पश्चिम स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है और वहीं पालम में घरेलू टर्मिनल अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनल से पांच किलोमीटर की दूरी पर है। यहां उतरने के बाद इंडिया गेट तक पहुंचना भी आसान है, क्योंकि हवाई अड्डे के कोच दिल्ली परिवहन निगम से इंटर स्टेट बस टर्मिनल-आईएसबीटी, कश्मीरी गेट और पूर्व सैनिकों की एयरलिंक परिवहन सेवा द्बारा कनॉट पैलेस तक संचालित होते हैं। ऐसे में, पर्यटकों के लिए यहां पहुंचना आसान है।
ट्रेन सेवा
राजधानी दिल्ली में नई और पुरानी दिल्ली दो पहुंच रेलवे स्टेशन हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तो क्नॉट पैलेस से पैदल दूरी पर है और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन क्नॉट पैलेस से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसीलिए दोनों ही जगहों से पहुंचना यहां ज्यादा कठिन नहीं है। वैसे India Gate तक पहुंचने के लिए आप निजामुद्धीन या फिर नई रेलवे स्टेशन को प्राथमिकता के तौर पर चूज कर सकते हैं। दिल्ली व एनसीआर के किसी भी शहर में पहुंचने के बाद इंडिया गेट तक पहुंचने के लिए मेट्रो भी एक उपयुक्त माध्यम है। इंडिया गेट के नजदीकी मेट्रो स्टेशनों में केंद्रीय सचिवालय शामिल है, जो येलो लाइन पर पड़ता है।
बस सेवा
बस सेवा के माध्यम से दिल्ली कई अन्य प्रदेशों से जुड़ी हुई है। आसपास के प्रदेशों जैसे उत्तराखंड, उत्तर-प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान व मध्यप्रदेश से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इन राज्यों की परिवहन निगम की बसें दिल्ली आती-जाती हैं, जो आनंद बिहार बस अड्डा या फिर महाराणा प्रताप अंतर्राष्ट्रीय बस अड्डे पर उतारती हैं। यहां से या तो डीटीसी की बसों के माध्यम से यहां पहुंचा जा सकता है या फिर मेट्रो, ऑटो व टैक्सी के माध्यम से।

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