झीलों का शहर नैनीताल | sarovar nagri nainital

nainital ki sair in hindi
 नैनीताल का नाम सुनते ही जेहन में झीलों की आकृति सहज ही कौंधने लगती है। सच भी है, क्योंकि नैनीताल है ही झीलों का शहर। जिसे भारत का झीलों वाला कस्बा भी कहा जाता है। उत्तराखंड का यह खुबसूरत शहर हर किसी को लुभाने में माहिर है। आसपास के स्थान अपने खूबसूरत परिदृश्यों और शांत परिवेश के कारण नैनीताल पर्यटकों के लिए स्वर्ग के रूप में जाना जाता है। ऐसा भी बताया जाता है कि सन 1839 में ब्रिटिश व्यापारी, पी. बैरून ने यहां की नैसर्गिक खूबसूरती से प्रभावित होकर ब्रिटिश कॉलोनी स्थापित की थी, जिसकी वजह से भी नैनीताल की लोकप्रियता में और भी चार चांद लग गए और यह पर्यटकों के लिए उत्तराखंड का सबसे मशहूर पयर्टन डेस्टीनेशन के रूप में मशहूर हो गया। तभी तो हर वक्त यहां पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है।

नैनी झील का रोमांचक दृश्य 
जब गर्मी के सीजन की बात हो तो फिर बात ही कुछ अलग है। हर कोई चाहता है कि क्यों न नैनीताल की सैर करके आएं। नौकायन का मजा लेने वाले लोग तो अवश्य ही यहां आते हैं, लेकिन यहां और भी कई रमणीय स्पॉट हैं, जो पर्यटकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए तो यह एक ऐसा शहर है, जहां वे वीकंड पर आसानी से यहां आ भी सकते हैं और वापस भी जा सकते हैं, क्योंकि यह अन्य पर्यटन स्थलों की अपेक्षा दिल्ली-एनसीआर से कम दूरी पर स्थित है। 
 नैनीताल से जुड़े कुछ खास तथ्य
 नैनीताल हिमालयन बेल्ट के तहत कुमाऊं की पहाड़ियों के बीच स्थित है। नैनीताल को श्री स्कंद पुराण के मानस खंड में तीन संतों की झील व त्रि-ऋषि सरोवर के रूप में उल्लेखित किया गया है। बताया जाता है कि इन संतों के नाम अत्री, पुलस्त्य और पुलाह थे। जो अपनी प्यास बुझाने के लिए नैनीताल में रुके थे, लेकिन उन्हें कहीं भी पानी नहीं मिला। तब उन्होंने एक गड्ढ़ा खोदा और मानसरोवर झील से लाए गए जल से इस गड्ढ़े को भर दिया। तभी से नैनीताल नामक झील अस्तित्व में आई। इसके अलावा एक जो अन्य कथा इस संबंध में प्रचलित है, वह है हिंदू देवी सती यानि भगवान शिव की पत्नी की बाईं आंख इस जगह पर गिर गई थी, जिससे इस आंख के आकार की नैनी झील का निर्माण हुआ। झील के किनारे नैना देवी का मंदिर भी है, जो बड़े ही आस्था का केंद्र है। जो भी व्यक्ति नैनीताल आता है, वह नैना देवी के दर्शन से अभिभूत हो जाता है। 
ये हैं खास जगहें
 हनुमानगढ़
 जो लोग नैनीताल भ्रमण की योजना बना रहे हैं, वे हनुमानगढ़ जा सकते हैं। यहां बजरंग बलि हनुमान जी का काफी प्रसिद्ध मंदिर है। 
 नैनादेवी
 नैनीताल झील के किनारे स्थित नैना देवी का मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इस स्थल को भारत के 51 शक्ति-पीठों में गिना जाता है। 
किलबरी
 पर्यटक, नैनीताल से लगभग 10 किमी. दूर स्थित सुंदर 'किलबरी’ पर पिकनिक मनाने जा सकते हैं। यहां हरे भरे ओक, पाइन, और रोडोडेंड्रन से भरे जंगल हैं, जिसे प्रकृति के बीच आराम फरमाने का एक आदर्श पिकनिक स्पॉट माना जाता है। यहां रंग-बिरंगे पक्षियों की 580 से भी अधिक प्रजातियों के लिए प्राकृतिक आवास है, जिसमें ब्राउन वुड-आउल (उल्लू), कॉलर ग्रॉसबीक, और सफेद गले वाले लाफिग थ्रश शामिल हैं। 
 लड़ियाकांटा
 यह जगह समुद्र की सतह से 2481 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां आने वाले दर्शकों के लिए यह पूरे क्षेत्र का एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। यह नैनीताल की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है, जो शहर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

नैनीताल से कुछ इस तरह दिखती है हिमालय पर्वत श्रृंखला 
खुर्पाताल
 यह नैनीताल की तरह ही झील है, लेकिन उससे छोटी है। खुर्पाताल भी पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र बना रहता है। इसके अलावा सम्मोहित कर देने वाले दृश्यों का आनंद लेने के लिए 'लैंड्स एंड’ सबसे सही जगह है। यह नैनीताल के आस-पास के और हरी-भरी घाटी के मनोहारी दृश्यों को भी देखने का मौका देता है। पर्यटक, गंतव्य के पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए रोपवे से यात्रा कर सकते हैं। रोपवे कुल 705 मीटर की दूरी कवर करता है और प्रत्येक रोपवे कार में 12 व्यक्ति सवार हो सकते हैं। 'स्नो-व्यू’ तक रोपवे के द्बारा आसानी से पहुंचा जा सकता है, यह एक आदर्श सुविधाजनक स्थान है, जहां से पर्यटक हिमालय पर्वतमाला के सौंदर्य और बर्फ की चादर ओढ़े, ऊंची चोटियों के सुंदर दृश्यों को भी आसानी से देख सकते हैं। 
नैना पीक
 नैना पीक को चाइना पीक के नाम से भी जाना जाता है। यह नैनीताल की सबसे ऊंची चोटी है। यह समुद्र तल से 2611 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तक घोड़े की सवारी करके पहुंचा जा सकता है। 
 टिफिन टॉप या डोरोथी सीट
 यह एक आदर्श पिकनिक स्थल है, जहां पर्यटक अपना खाली समय भरपूर मनोरंजन के साथ बिता सकते हैं। इस जगह को डोरोथी केलेट (एक अंग्रेजी कलाकार) के पति के द्बारा विमान दुर्घटना में उसकी मौत के बाद विकसित किया गया था। 
 ईको-केव-गार्डन
 नैनीताल का दूसरा लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण केंद्र है, जो आगंतुकों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली से परिचित करवाता है। इसके अलावा और भी कई स्थल हैं, जहां आसानी से घूमा जा सकता है, इनमें राजभवन, चिड़ियाघर, फ्लैट्स, मॉल, सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस, और पंगोट आदि जगहें शामिल हैं। वहीं, ठंडी सड़क, गुर्ने हाउस, खुर्पाताल, गुआनो हिल और अरबिदो आश्रम भी देखने योग्य हैं। 
 नौकायन, ट्रैकिंग और घुड़सवारी का उठाएं आनंद
 यहां मस्त घूमने वाली पिकनिक स्पॉटस के अलावा और भी तरीके हैं, जिनके माध्यम से यात्रा का पूरा आनंद उठाया जा सकता है। इनमें सबसे खास है नौकायन। नैनीताल झील में नौकायन करने का मजा तो अपने-आप में बेहद अलग और आनंददायक है। शहर के बीचोंबीच स्थित इस झील में नौकायन के दौरान झील के पानी में पूरे शहर का नजारा साफ तौर पर देखा जा सकता है। पानी के अंदर शहर का यह प्रतिबिंब पर्यटकों को खूब लुभाता है। इसके अतिरिक्त यहां ट्रैकिंग और घुड़सवारी का भी आनंद उठाया जा सकता है। 
 नैनीताल कैसे जाएं
 देश के किसी भी भाग से नैनीताल जाया जा सकता है। यह सड़क, रेल और वायु तीनों मार्गों से जुड़ा हुआ है। इसीलिए पर्यटकों को यहां आने व यहां से जाने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो सकती है।
 सड़क मार्ग
 नई दिल्ली से नैनीताल की दूरी 299 किलोमीटर है। दिल्ली से नैनीताल के लिए प्रतिदिन लगभग 22 बसें चलती हैं, जिनमें राज्य परिवहन निगम के अलावा प्राइवेट बसें भी शामिल हैं। दिन-रात बसों की आवाजाही बनी रहती है। बस से यात्रा करने में करीब 7 से 8 घंटे के अंदर नैनीताल पहुंचा जा सकता है, जबकि अपने वाहन से यह सफर मात्र 5 से 6 घंटे में तय किया जा सकता है।
 रेल मार्ग
 रेल मार्ग से भी नैनीताल पहुंचा जा सकता है। रानीखेत एक्सप्रेस नई दिल्ली से हल्द्बानी तक जाती है। हल्द्बानी से नैनीताल की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। यहां से बस के अलावा प्राइवेट टैक्सियों के माध्यम से नैनीताल आसानी से पहुंचा जा सकता है। 
 हवाई मार्ग
 नई दिल्ली से नैनीताल के लिए सीधे कोई हवाई सेवा नहीं है, लेकिन नई दिल्ली से सीधे पंतनगर जाया जा सकता है। हवाई मार्ग से यहां पहुंचने में करीब 3 घंटे 44 मिनट लगते हैं। एयर इंडिया से हवाई मार्ग का किराया करीब 3616 रुपए है। पंतनगर से सड़क मार्ग के माध्यम से आसानी से नैनीताल पहुंचा जा सकता है। 





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